cover36

तुझे इस वबा से बचाते बचाते जो बच ना सका,
ना समझ सकोगे कितना अहम कितना अज़ीम था वो;
मेरा और तुम्हारा हकीम था वो।

जब देश पूरा लॉकडाउन में समा गया,
जब सड़कों गलियों पर सन्नाटा छा गया;
दो वर्दीयां तब भी मचल रही थी,
एक थानेदार था पुलिस अफसर था,
जो कोरोना फैलने से रोक रहा था।
दूसरा कोई PPE kits पहने,
दर्दीयों की सेवा में तल्लीन था।
वो हमारा हकीम था।।

जब तुम अपने घर पे आराम में थे,
अपने परिवार के साथ प्यार के इजहार में थे,
जिनका रोजगार चालू था वे भी रात को घर आते,
किरानेवाले हो या अफसर, अपने बच्चो घरवालों को गले लगाते;
तब एक सेवक रोज़ घर आकर भी परिवार से दूर था,
Self quarantine में अकेला रहने पर मजबूर था।
हां वो हमारा हकीम था।

हकीम सेवक था, है, और रहेगा ye भी सही है।
पर कुछ हमारे अनमोल रत्न अब इस जहां में नहीं हैं,
जो कॉरोना से सबको बचाते बचाते खुद बच ना सके,
सबको राहत दिलाते दिलाते खुद राहत का लम्हा ढूंढ़ ना सके,
हर ऐसा हकीम सरहद के बिना भी शहीद है,
हमारे दिलो में ज़िंदा हर वो शहीद हकीम है।

कोरॉना में शहीद हुए हर हकीम को अर्पित 👏🏻

Read Magazine PDF

Authors

– Master Muntazir
Associate Editor TMJ
3rd-year Medical Student
Parul Institute of Medical Sciences and Research

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here